Is Nationalism Matter of Discussion?





Jaliyawala Baugh
Jaliyawala Baugh (symbol of Nationalism )

Nationalism

अब ये कैसा मौसम आया, बेटो से ही धोखा खाया,
पल्लु में जिसे छुपा के रखा, उसने ही धोखे में रखा,
खो चुके हो जमिर अपना, खो चुके हो विश्वास सबका,
कह्नैया तुम वो बेटे हो, मां को बेच, खुश होते हो,
ना मिलेगी जन्नत तुजको, ना मिलेगा सुकुन तुजको,
ये ना समजो तुम जित जाओगे, दुम दबा के तुम भाग जाओगे,
भगतसिंह अभी जिन्दा है, देश का जमिर अभी जिन्दा है,
भाग कन्हैया भाग तुं, छीपजा मिडिआ के पल्लुमें तुं,
कल को तेरे टुकडे होंगे, सपने तेरे चुर चुर होंगे,
नादान है तुं, कायर है तु, समज जा, संभल जा अभी,
सिर जुका तु मां के आगे, जन्नत मिलेगी आगे आगे,
भारत आज भी अखण्ड है, देशभक्ति आज भी अखण्ड है,
सब के आगे संविधान खडा है, उसके पिछे यौवन खडा है,
रास्तो से हट जावो तुम, टकराओगे तो चुर हो जाओगे तुम,
तुम क्या लडोगे हमसे, पहेले बरोबरी करो हमसे,
हमारे पैसो से पढने वाले, जुठी देशभक्ति दिखाने वाले,
देश की गदारी महेंगी पडेगी, जेल में चक्की पिसनी पडेगी,
जा तु किसी और को समजा, दिल को तेरे खुद बहेला,
नही चलेगी तेरी भाषणबाजी, नही चलेगी तेरी नारेबाजी,
आज भी है चाहने वाले, देश के लिये मर-मिटने वाले,
जितने “पथीक” तुम मारोगे, हर घर से “पथीक” निक्लेगा.

Nationalism is not a topic of discussion. Till today no one have to show or prove his/her love toward our nation.  लेकिन हाल ही के समयमे भारतमें कुछ एसी घटनाएं हुयी तो यह मुद्दा उठने लगा। अब सोचो भला अगर कोइ यह कहे के बाजुवाली आंटी मेरी मां से ज्यादा अच्छी है, तो इसका मतलब आप समज सकते है की मांजरा क्या हो सकता है? यहां तो इस से भी बुरी हालत है, आंटी तो अच्छी है लेकीन मेरी मां बहोत बुरी है! तो भाइ, आप इधर हमारे घर में क्या कर रहे हो? हमारे पैसो से पढाइ करनी है और हमको ही गाली देते हो? अगर आंटी ही पसंद है तो उसके घर मे रहो, उसके पैसो से पढाइ करो। चलो ठिक है की तुम को पता है की बाजुवाली आंटी तुम को अपने घरमें घुसने दें पर तुम्हारा क्या भरोसा की जन्म देने वाली मां को धोखा दिया तो आंटी को क्यो नही दोंगे? तुम जरुर दोंगे, क्युंकी तुमारी फितरह ही गलत है। बिना महेनत के पैसो से जब तुम पढ रहे हो और होस्टेल में मौज-मस्ती कर रहे हो, अपने घर को बर्बाद करने की साजीश कर रहे हो तो क्या तुम्हारे बडे भैया चुप रहेंगे? तुम क्या यह समजते हो की घर में बोलने की, कुछ करने की आझादी है तो तुम घर को ही मिटा दोंगे? और बडे भैया सहिष्णू होके देखते रहेंगे?

तुम बोलते हो की तुम्हारी कोइ इज्जत नही करता, तुम्हारे हक छीन लिये जा रहे है, तो फिर बताओ के तुम्हारी पढाइ का, होस्टेल का खर्चा कोन उठा रह है? क्या बाजुवाली आंटी उठा रही है? जब तुम बरसो घर तोडने की बात करते हो तब बडे भैया चुप बैठे थे, अब जब तुम को थोडी डांट क्या लगायी, तुम बडे भैया को सिखाने लगे की घर कैसे चलता है? चलो मान लेते है की घर पर्फेक्ट नही है, घर मे कुछ कमीया है, तो क्या घर को तोड देते है?  घर मे अगर दिमक लग जाये तो दिमक वाली दवा करते है, घर नही तोडते, यह दिमक तुम हो, तुम्हारी विचारधारा है। तुम जिसका नाम ले कर संविधान की बात करते हो, वोह महापुरुष आज जिन्दा होता तो शर्म से ही मर जाता। भाइ तु पहेले पढाइ कर, अच्छे मार्क ला, यह देशभक्ति तेरे पल्ले नही पडने वाली है।

तु सोच रहा है की तु देश को अच्छी राह दिखायेगा, देश को बदल देगा, सिस्टम मे सुधार करेगा, तो भाइ  सुन ले, पहेले संविधान और न्याय व्यवस्था पर भरोसा होना चाहिये। अगर तुने नारे नही लगाये और तेरे बंदो ने लगाये है तो तु भी उतना जी जिम्मेदार है भैया। देश मे गरीबी है तो सरकार जवाबदार होती है, देशमे भ्रष्टाचार हो तो सरकार जवाबदार होती है तो तेरे संगठनमे कुछ एसे लोग है तो तु भी जवाबदार हुवा ना भैया? क्युं स्विकार नही करता? और तेरे बंदे क्यु भाग गये थे? अगर तुम सच्चे हो तो फिर सामने क्यु नही आये? और हा, जब पकड लिये गये तो तुमने तगडी फीस लेने वाले वकिल रखे? अगर तु इतना पैसा खर्च कर सकता है तो अपनी मां की गरीबी की बात तो ना करता, क्युं उसकी ममता को भरे बाजार मे उछालता है? इस उमर में अपनी मां को आंगणवाडी मे क्युं काम करवाता है? इतने पैसे होते तो घरकी मरम्मत करवा लेता। भाइ फिर से कहे रहा हु, देशभक्ति तेरे पल्ले पडने वाली बात नही है।

BTW, Nationalism is very sensitive matter. Everyone has its own meaning. देशभक्ति करने का या दिखाने आपका खुद का नजरीया दुसरो से अलग हो सकता है, लेकीन देशको तोड कर देशभक्ति जताने का नजरीया किसी भी सुरतमे जायझ नही है। यह पुरी बात उन बुद्धिजीविओ को ी तमाचे से कम नही जो सोचते है की देशद्रोहीयों को सबक सिखाने से ज्यादा जरुरबुलेट ट्रेन है। चलो आपका नझरीया सही हो एसी आशाके साथ “जय हिंद”। बिना गले पर छुरा रखे, “भारत माताकी जय”, “भारत माताकी जय”, “भारत माताकी जय”॥

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