Inner Voice
Inner Voice
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| Inner Voice |
कभी ढुंढा आसमानकी
उंचाइयोंमें,
ना मिला सागरकी गहेरायिओंमें,
कभी ढुंढा सितारोंकी
हलचलमें,
ना मिला हथेलीकीं रेखाओमें,
कभी ढुंढा मंदरोकी
चोखट पे,
ना मिला काशी-काबेकी
दहलिझ पे,
कभी ढुंढा गंगाकी लहरो
में,
ना मिला झमझमके कतरे
में,
खोयी जवानी, चढा बुढापा
सरपे,
बचपन बिता किताबोंके
बोझसे,
भिग ना पाये बरसातोंमें
सुकुनसे,
तडपते रहे हाथ फेलायें
झर्रे-झर्रेसे,
नाच पडे सब पत्ते पत्ते
शाखोंसे,
जब आवाज आयी आंतर्मन
से,
हुवा उजियारा, छटा
अंधियारा,
चल पडा “पथीक” खोजकी
राहोंसे.
Inner voice is the best music ever you can heard
in a lifetime. जिंदगीकी भाग-दौडमें तुटता-सम्भलता,
ठहेरता-बेहता आदमी शांतिकी खोजमें ना जाने क्या क्या नही करता? वोह परमानंद को पाना
चाहता है लेकिन मिलता है क्या? सिर्फ खोजने के रास्ते। वोह हर रास्ते को तलासता है,
उस पर चलता है लेकिन मिलता है क्या? सिर्फ पिछे छुट चुका समय। वोह जाता है मंदिरोमें-मजारोमें,
स्नान करता है नदियों में, लेकिन मिलता है क्या? सिर्फ जुठा आत्म-संतोष। वोह समय गवांता
जाता है और कुछ कर नही पाता है, अपराधभाव से वोह जिता तो है लेकिन जी नही पाता। जब
अंतःकरण से सोइ हुयी चिन्गारी दहक उठती है तो वोह पुरी जिन्दगी को रोशन कर देती है।
फिर कोइ रास्ता कोइ मंझिल नही रहेती, होता है तो सिर्फ होना।
Listen to your
inner voice to enjoy each and every moment of the life. So Read, Think and Act –
Uday Bhatt

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