7 Changes Which Can Make India Better-Part-1

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा, हम बुल-बुले है इसकी, यह गुलिस्ता हमारा। India better नहीं best है और रहेगा।


Photo Of Indian Soil
India
यह सब बाते हम कई सालो से बोल रहे है और हम जानते है की हम उस देशमे रहेते है जो पुरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम की भावना और ले जाने की क्षमता रखता है। आज India पुरी दुनिया की राजनीती (Politics) को change कर सकता है ऐसी ताकात रखता है। हमारे देशने लिये हुवे फैसले से पुरी दुनिया प्रभावीत होती है। कुछ ही सालोमें अगर हिन्दुस्तान वैश्विक फलक पर अपनी योग्यता के बल पर शिखर पर पहोच जाये तो प्रगती के इस पंथ पर हमे कोइ रोकने वाला नहीं है। आज भारत की इस उंचाइ को देख कर हम गर्व महेसुस करते है। लेकिन फिरभी हम India को better and batter बनाना क्युं चाहते है? फिरभी क्युं कुछ कमी सी लगती रहेती है?

इस उंचाइयो को पा कर भी कुछ ना कुछ छुट गया है। हम उपर तो जा रहे है मगर कुछ छोड रहे है, कुछ को नजर अंदाज कर जा रहे है, कुछ भुल कर या तो भुला कर आगे बढ रहे है, ऐसा क्युं लगता है? आप सोच रहे है की India बढ रहा है, मैं नही, मेरा महोल्ला, मेरा गांव या मेरा शहर नहीं। वोह तो धरा का धरा पडा है। अगर India बढ रहा है तो में क्युं Better फील नही कर रहा? मेरा महोल्ला या गांव क्युं वेसे का वैसे दिख रहा है? हां कुछ लोग है जो प्रगती करते दिख रहे है लेकिन वोह तो उसका खुद का प्रयत्न है, वोह थोडे ही India को बढा रहा है? वोह तो सिर्फ उनका नीजी विकास है। तो फिर हम केसे कह सकते है की India बढ रहा है? आज सरकार मेरे लिये, महोल्ले या शहर के लिये कुछ विकास के पैसे देती तो है, कुछ पैसे काम मे लगते है और बाकी के बाबुओ के जेबमे लगते है। अरे भाई, अब तो मौसम यह है की सही काम करने के पैसे लगते है, पहेले तो फिरभी गलत कामो के लगते थै। आज मैं टेक्ष दे रहा हुं और मेरे पैसे कोइ और उडा ले जा रहा है। महेनत करे हम और मौज करे कोइ और। महेनत करके हम अपने बच्चो को अच्छे स्कुल मे दाखिला नही करवा सकते और कोइ हमारे पैसो से किसी और के बच्चे फोरेन पढने जा रहे है। बढ तो India रहा है, मेरा पतन हो रहा है। 

थीक है, तो बात यह है की India Better हो रहा है मैं नही। तो फिर इसका मतलब यह हुवा की India मेरे पैसो से या मेरी बुध्दि से आगे बढ रहा है। मैं अगर मेरी ओफिसमे पुरे दिन अपना दिमाग लगा कर काम करता हुं तो वोह फायदा India को मिलता है। अगर में मेरे कमाये हुवे पैसे से कोइ चिज खरीदता हुं तो उसमे भी India का ही फायदा है। अगर मेरे बच्चे वकिल या इन्जीनीयर या कुछ और बन गये तो उसका परोक्ष फायदा India के विकास मे ही होगा ना, क्युं की वोह भी मेरी तरह किसी ओफिसमें काम करेगा और उसके दिमाग का फायदा India को ही मिलेगा। अरे..! बाद उसके बच्चे होंगे! फिर वही चक्कर शुरु होगा। मेरा विकास कब होगा? मैं क्या change करुं जो मेरे हालात बदल दे? 

यह सोच सिर्फ आपकी नहीं है हिन्दुस्तानमे बसे हुवे ज्यादातर Indians की है। जब हम अपने देश के बारे मे सोचते है तो लगता है की मैं और मेरा देश दोनो अलग चिजे है। उसका विकास या उसका पतन मुजसे नही जुडा है। अगर में अपनी इन्कम बढाता हुं तो वोह मेरा विकास है देश का नही। अगर मैं अपना दिमाग लगा कर प्रमोशन लेता हुं तो वोह मेरा विकास है देश का नही। मेरा बेटा इन्जीनीयर बन गया तो उसमे देशका कोइ हाथ नही, वो तो सिर्फ मेरी कमाइ और उसके बल-बुते पर बना है। मैं अगर कोइ सामान खरीदता हुं या फिर बेचता हुं तो उसमे जो टेक्ष लगता है वोह मेरे कुछ काम नही आता। 

तो पहेले बात करते है खुद के विकास की। इन सवालो का जवाब अपने आप से पुछीये.
1.   आपके पिताजी या दादाजी कहां रहेते थे और आज आप कहां रहेते हो?
2.   आप कहां सेटल्ड हो और आपने अपने बेटों या बेटींयों को कहां सेटल करने का सोचा है?
3.   आपके पिताजीने कहां तक पढाइ करी थी? आपने? और आप अपने बच्चो को कहां तक पढाना चाहते हो?
4.   आपकी और आपके पिताजी की कमाइ मे कितने पैसो का अंतर है?
5.   आज भी आप पोस्ट का युज करते हो या मोबाइल का?
6.   ओफिस पैदल जाते हो या कोइ व्हिकलमे?

यह तो हो गयी सामान्य सी बाते, अब इस प्रश्नो का उत्तर भी अपने आप से पुछीये.
1.   कुछ सालो पहेले आपके पास एक जगह से दुसरी जगह जाने के लीये कितने ओप्शन्स थे?
2.   उच्च शिक्षण पाने के लिये आप के पास कितनी शाखाए थी या कीतनी संस्थाए थी?
3.   अपनी परीवारकी सुखाकारी की कितने चिजे है जो की कुछ सालो पहेले नही थी?

वैसे तो लिस्ट लंबी है। लेकीन आप अब समज रहे है की बात क्या है? जब हम अपना विकास खुद नही देख सकते तो देश का कैसे देख शकते है? विकास कोइ चिज नही है जो हाथ मे पकड शके। उसे मह्सुस करना पडता है। समजना पडता है। “आप” और “देश” चाह कर भी जुदा नही हो शकते। क्युं की आप ही देश हो, आप का ही विकास देश का विकास है, आपका प्रमोशन देशका प्रमोशन है। अगर आप कोइ चिज खरीदने की शक्ति रखते है तो उसका मतलब भी यह हुवा की टेक्षके साथ आप अपने देशके विकास मे सहभागी हो रहे है। अगर आपका बेटा इन्जीनियरिंग पढ रहा है तो उसके पास ओप्शन है तभी वोह कर पा रहा है। 

जो विकास हो रहा है उसमे हम कैसे इजाफा करे और कैसे गती बढायी जाये, जिससे “Better  India” होने से ज्यादा “विकसित भारत” बनता जाये? जब बिज को सही पोषण मिलता है तो ही वो वटव्रुक्ष बनता है, तभी तो शुरुआत हमारी शिक्षण-प्रणाली (Education System) से करनी होगी। प्रस्थापित प्रणाली मे सुधार करके विकासकी दर को सुनिश्चित किया जा सकता है।

भारत को Better बनाने के लिये जो 7 Changes की बात है यह इस सिरिज की पहेली पोस्ट है। अगर आपके पास कोइ विचार या सुझाव है तो प्लिज मुजे मैल करे या तो कमेन्ट करे। जय हिन्द।


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