Little Wounds
छोटी छोटी चोंटे…
मैं तुजमें युं समा
गया,
जैसे चायमें घुली सक्कर.
तुं मुजसे युं जुदा
हो गया,
जैसे चाय-पत्ती से भरा पतिला॥
(2)
बेवफाइ तो तुने अच्छी
निभायी,
ना निभायी प्यार की
रशमे|
खुल गयी खिडकियां दिलकी,
ले गयी चिडिया सारी
कसमे॥
(3)
(अफझल कि बर्सि पर
दिल्ली JNU में मुस्लिम छात्रो
द्वरा “पाकिस्तान जिन्दाबाद”
के नारे लगाये गये.
इस विषय पर दो लाइने|)
जनाब मांजरां जरा टेढा
है इस बार,
खुर्सी, रंगमंच, पुस्तकें
चुप हुवे है इस बार|
घोल रहा है जहर रग
रग मैं इस बार,
“पथीक” बैठ तमासा देख
रहा है इस बार॥
Little wounds is some of my lines just written last night. Sometimes it is hard to think positive so my finger-tips click negative key-strokes on my keyboard. Here is some of those negative lines.
Thank you.

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