विमुद्रिकरण पार्ट - 2

विमुद्रिकरण  क्या है और उनके फायदे क्या है? (पार्ट - 2)

उदय भट्ट
ता. २७-नवेम्बर-२०१६

मैंने अपनी अगली पोस्ट में यह समजाने की कोशिश की थी की एक्च्युल समस्या क्या है ? आशा है कि कुछ पहेलु आपको समझ आये होंगे । अब बात आती है कि इसका उपाय क्या है ?

मोदी सरकार ने इस समस्या के हल के लिए विमुद्रिकरण करने का फैसला किया है । हम उसी सिनेरियो में आगे बढ़ते है कि हमारी अर्थव्यवस्था में जो 10000रुपये है उसमें 85% से ज्यादा की राशि 500 रुपये और 1000रुपये की नोटों की शक्ल में है । अब मोदी सरकारने जो ज्यादा मूल्य की नॉट है उनको बंद कर दिया है । यानि की 500रुपये और 1000रुपये की नॉट से आप कोई भी व्यव्हार नहीं कर शकते। अब इससे क्या होगा इसको समझने के लिए पहले पैसे की व्याख्या समझनी पड़ेगी।

पैसा एक मीडियम (माध्यम) होता है जिससे आप कोई चीज़ खरीद सके या कोई सेवा का लाभ ले सके । पैसे की कागज की कोई वेल्यु नहीं है, उन पर छपे आंकड़े का मूल्य है (मैं धारक को ५०० रुपये अदा करने का वचन देता हूँ ) । अब समझने वाली बात यह है कि उस चक्र (जिसका जिक्र पहेली पोस्टमें है) के कारण लोग पैसे को जमा करने लगते है क्यों की बिनहिसाबी पैसे को खर्च करने पर उनकी पूरी वेल्यु रिटर्न मिलती है और सरकार को कुछ नहीं जाता । अब समझमें आया की कालाधन क्यों बढ़ता है ?

अब जब विमुद्रिकरण से नोटों के कागज रद्दी हो जायेंगे तो घर में रखने से क्या फायदा ? इस लिए अगर लोग कुछ भी करके अपने काले धन को सफ़ेद कर लेंगे तो भी फायदा सरकारको ही है क्यों की अब वह राशिका हिसाब मिल जायेगा । फिर बारी आती है सब व्यवहारों को पारदर्शी करने की । जब लोग पैसा बैंको में जमा करने लगेंगे तो फिर एक और नियम लागू होगा की सब व्यव्हार बैंक से ही होने चाहिए और बड़े नॉट बंध । नगद व्यव्हार को कोई सिक्योरिटी नहीं मिलेगी , आप चाहे तो 5-10हजार नगद पेमेंट कर शकते है मगर उसमे सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी कोई इन्स्योरन्स नहीं होगा । पैसा कोई चुरा ले गया तो गया ।
बैंक से व्यवहार करने से सरकार को एक एक पैसे का हिसाब मिलेगा, बैंक में पड़ा हुवा पैसा लोन या इन्वेस्टमेंट में काम आएगा, ब्याज दर कम होंगे क्यों की बैंक के पास अब बहोत पैसा जमा पड़ा है।

बात आती है सरकार के पास पैसे कहा से आएंगे? तो इसका हल यह है कि हम जब भी कोई ट्रांजेक्शन करेंगे तो उस पर टेक्ष लगेंगा। और पूरी अर्थ व्यवस्थामें यही एक टेक्ष रहेगा कोई और दूसरा टेक्ष लगाने की जरुरत नहीं रहेगी।

जब सब व्यावहार पारदर्शी होंगे तो कालाधन बनेगा ही नहीं और नाही कोई गेरक़ानूनी फंडिंग होगी और नहीं कोई पॉलिटिशियन या कर्मचारी या कॉन्ट्रेक्टर करप्शन कर पायेगा । एक साफ सुथरी अर्थव्यवस्था देशको मिलेगी।

थोड़ा लंबा था मगर जरुरी था। अभी जो विमुद्रिकरण के कारण दिक्कत हो रही है वह जो 85% राशि का खालीपन है। सरकार धीरे धीरे नॉट प्रिंट करवा रही है, ATM में सुधार कर रही है और हां दूसरी बात ₹२००० का नोट इसलिए प्रिंट करवा रही है क्यों की जो खालीपन है वह जल्द ख़त्म हो, मगर यह नॉट भी १-२ साल में नहीं रहेंगे ।

आशा है कि आप कुछ समझ सके होंगे । यह पूरी अर्थव्यवस्था को बदलने की शरुआत मात्र है कोई 50दिन में ख़त्म होने वाली चीज नहीं है । और ऐसी आशा रखना भी मूर्खता है ।

अस्तु ।
जय हिंद ।

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