विमुद्रिकरण पार्ट - 1

विमुद्रिकरण क्या है और उनके फायदे क्या है ? (पार्ट - 1)

उदय भट्ट
ता. २७-नवेम्बर-२०१६

सीधी सी बात से शुरुआत करते है जिसके लिए आपको कोई दिमाग लगाने की जरुरत नहीं पड़ेगी । कोई भी देश चलाने के लिए उसको अर्थतंत्र और व्यवस्था (Governance) की जरूर होती है । गवर्नमेंट कोई बिज़नेस नहीं करती है इसलिए वह फायदा नहीं करती है । देशकी जरूरतों के हिसाब से वह बजट बनाती है और उसी के हिसाब से टेक्स लगाती है । भारत में यह व्यवस्था इस तरह से ही काम करती है । मान लीजिये भारत की अर्थव्यवस्था (रिज़र्व बैंक) के पास 10,000 रुपये है उनमे से विकास और व्यवस्था को बनाये रखने के लिए 1000 रुपये की जरुरत है तो सरकार यह 1000 रुपये जनता के पास से टैक्स के तौर पर कलेक्ट करती है । जब हम कोई चीज़ खरीदते है या कोई सेवा का लाभ लेते है तो हमने खर्च किये पैसे से कुछ राशि सरकार को जाती है । इस राशि का उपयोग हमारी सुखाकारी के आयोजन के लिए किया जाता है ।

अब दूसरी बात, जब हम कोई व्यवहार नगद करते है और उनका हिसाब सरकार को नहीं देते है तो वह टेक्स राशि सरकार को नहीं जाती और उस पूरी राशि का हिसाब सरकार के पास नहीं रहता। अब सरकार का जो बजट है कि इस साल 1000 रुपये टेक्स कलेक्ट करना है वह पूरा नहीं होता। इसके अलावा हमने जो बिनहिसाबी व्यवहार किया वह कालाधन बन जाता है। यह काले धन से आप कोई भी व्यवहार करते है उसको सरकार पकड़ नहीं सकती।

अब सरकार के बजट के हिसाब से जो  1000रुपये आने वाले थे वह मान लीजिए की सिर्फ 900 रुपये आये तो सरकार इन 100रुपये की आपूर्ति कैसे करेगी ? उन के पास इनकी आपूर्ति के लिए दो रास्ते है। पहला की जितने रुपये की कमी है उनके हिसाब से नॉट छापे । और दूसरा है कि कही से उधार या फॉरेन इन्वेस्ट स्किम निकाले । नॉट छाप दिए तो डॉलर के सामने रूपया गिर जायेगा और फॉरेन इन्वेस्ट करवाएंगे तो हमारे देश का पैसा बहार जायेगा ।

70 सालो से भारत इसी चक्र में फँसा हुवा है और कालाधन इतना बढ़ गया है कि एक ताकतवर पेरेलल गवर्नमेंट उभर आई है । अलग अलग क्षेत्रमें इन काले धन की फंडिंग से गवर्नमेंट की पॉलिसी देश के विकास की नहीं मगर कुछ इंडस्ट्रियलिस्ट के फायदे में ज्यादा बनती है । दाऊद भी इन चक्र की ही देन है ।

अब बात आती है इन सब से निजाद कैसे पायी जाए ? इनका जवाब नैक्ट पोस्ट में है ।

अस्तु ।
जय हिंद ।

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