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Showing posts from February, 2016

JNU Issue

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Students   देशद्रोह का नारा कोई लगा गया, देश को आगमें जोंक कोई चला गया, सुन ले "पथीक", खून निकलेगा कानो से, जम जायेगा लहू रगों में, सुन ले, बलात्कार हुवा, बेटा ही था वोह पत्थर दिल, किया उसको जलील सरेआम। सियासी बोली बोले हर कोई, व्यथा जान न पाये कोई, वोह गभराई, चिल्लाई, सुनने वाला था ना कोई, हुई सरेआम उसकी खींचातानी, देख कर मुस्कराये हर एक सियासी, कब तक, कहाँ तक, सितम होंगे माँ भारती पर, बस करो, रहम करो, मेरी माँ को इन जख्मो से दूर रखो।  JNU issue भारतकी शर्मनाक घटनाओमें से एक है। अगर देशमें रहे कर, देशके पैसो से पढाइ कर कर, वोह देश की अखन्डितता पर चोट करते है तो हमारी राजनैतिक इच्छाशक्ति, शैक्षणिक प्रणाली पर सवालिया निशान लगने हि है। JNU issue इस बात का प्रमाण है कि आतंकवाद हमारे सिस्टम में किस तरह से घुस चुका है। ये घटना इस देश की व्यवस्था प्रणाली की नाकामी है।  कलम भी खुन उगल रही है, किताबो के पन्ने कब्रस्तानो से कम नही है। आज मां भारती उनके ही बेटे की करतुतो का परिणाम भुगत रही है। गलती सिर्फ नारे लगाने वाले स्टुडन्टस की ही नही है,...

Illiterate Education System

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Illiterate Education System Illiterate Education System टपक रहा है खुन किताबो से, कलम गुजर रही थी कब्रस्तानो से। छुप बैठे है कातिल दिवारो में, हम ढुंढ रहे थे उसे बागिचो में। लगता था रोशनी आयेगी चरागो से, वोह खेल रहे थे मशालो से। सपने बुने थे कइ गाउ में उसके, दहकी थी गलिया शहेरो में उसके। गांधी-सुभाष को दुर छोड चले, अफजल - भट की राह चल पडे। आशा है की “पथीक” बन चले, राष्ट्रप्रेम का प्रतिक बन चले॥ जो हुवा वोह गलत हुवा, जो हो रहा है वोह गलत है लेकिन आशा है के भविष्य अंधेरेमें डुबा हुवा नही होगा| युवा पेढी जिस रास्ते को अपनाके आगे बढ रही है उसमे उसकी इतनी गलती नहीं है जितनी गुरुजनो की है। गर कोइ पौधे को सही खाद-पानी नही मिलता है तो गलती पौधे की नहीं उस माली की है। JNU में जो हुवा वोह एक तरह से शैक्षणिक प्रणालि की हि नाकामी हैं (छुप बैठे है कातिल दिवारो में, हम ढुंढ रहे थे उसे बागिचो में)। मांजरा पेचिदा है और इस घटना को कोइ एक परिपेक्ष्य में देखना भी मुनासिब नही होगा। डर इस बात का है की हमारी आज की गलती आने वाली पेढी को भुगतनी पडेगी। - Uday Bhatt ...

Little Wounds

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छोटी छोटी चोंटे… Little Wounds (1)  मैं तुजमें युं समा गया, जैसे चायमें घुली सक्कर. तुं मुजसे युं जुदा हो गया, जैसे चाय-पत्ती से भरा पतिला॥ (2)  बेवफाइ तो तुने अच्छी निभायी, ना निभायी प्यार की रशमे| खुल गयी खिडकियां दिलकी, ले गयी चिडिया सारी कसमे॥ (3) (अफझल कि बर्सि पर दिल्ली JNU में मुस्लिम छात्रो द्वरा “पाकिस्तान जिन्दाबाद” के नारे लगाये गये. इस विषय पर दो लाइने|) जनाब मांजरां जरा टेढा है इस बार, खुर्सी, रंगमंच, पुस्तकें चुप हुवे है इस बार| घोल रहा है जहर रग रग मैं इस बार, “पथीक” बैठ तमासा देख रहा है इस बार॥ Little wounds is some of my lines just written last night. Sometimes it is hard to think positive so my finger-tips click negative key-strokes on my keyboard. Here is some of those negative lines. Thank you.  ~ Uday Bhatt

Father

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My Father એક વડલો, ઘેઘુર અને પડછંદ વડલો, એકલો છતાં મસ્ત ફકિર વડલો, દશે દિશાએ શાખ પ્રસરાવતો, સહુ કોઇને એ છાંયા આપતો. આવે આવે ઝંઝાવાત આવે, આવે મોટા પુર, લગીરે ના એને ગાંઠતો, છો ને લાગે દવ ઘનઘુર. આવે આવે મુફલિસ આવે, આવે મોટા ભુપ, રાજા-રંક એક સમાન દિઠા, ના નાત જુવે ના કુળ. લાવે લાવે પાણી લાવે, લાવે મોટા ધુપ, ના કોઇ આશ ઉંચેરી, કોઇ હાર ચડાવે કે ધુળ. ધીરે ધીરે મૃત્યુ સમીપે, ઉભો મોટો શુર, સઘળુ મહી તિમિર ભરીને, ફેલાવ્યુ ચોમેર નુર. ~પથીક પિતાજી, બાપા, પપ્પા, પા કે ડેડ્ડી જે કહો તે, પણ વ્યક્તિ એની એ જ રહેવાની, એની એ જ લાગણી ને એની એ જ હુફ. માં નુ સ્થાન કોઇ ના લઇ શકે તો શું પિતાનું લઇ શકે? ના, ક્યારેય આ પરીસ્થિતી બદલાવી શકાતી નથી. પિતા એ માતા-પિતા એમ બન્ને રોલ નિભાવી શકે છે.   જીવનમાં ઝેર ના ઘુંટ પીતા પીતા ક્યારે “પિતા” થઇ જવાય છે એનો તો ખ્યાલ લગાવવો જ રહ્યો. એક પિતા એવુ જીવી જાય છે કે દિકરાને બીજા કોઇ આઇકોનની જરુર નથી રહેતી. લખવા જઇયે તો પાનાં ભરાઇ જાય પણ એના કુટુંબ પ્રત્યેના પ્રેમ, સમર્પણ અને બલિદાનના કિસ્સાઓ ખુટે નહ...