JNU Issue
Students देशद्रोह का नारा कोई लगा गया, देश को आगमें जोंक कोई चला गया, सुन ले "पथीक", खून निकलेगा कानो से, जम जायेगा लहू रगों में, सुन ले, बलात्कार हुवा, बेटा ही था वोह पत्थर दिल, किया उसको जलील सरेआम। सियासी बोली बोले हर कोई, व्यथा जान न पाये कोई, वोह गभराई, चिल्लाई, सुनने वाला था ना कोई, हुई सरेआम उसकी खींचातानी, देख कर मुस्कराये हर एक सियासी, कब तक, कहाँ तक, सितम होंगे माँ भारती पर, बस करो, रहम करो, मेरी माँ को इन जख्मो से दूर रखो। JNU issue भारतकी शर्मनाक घटनाओमें से एक है। अगर देशमें रहे कर, देशके पैसो से पढाइ कर कर, वोह देश की अखन्डितता पर चोट करते है तो हमारी राजनैतिक इच्छाशक्ति, शैक्षणिक प्रणाली पर सवालिया निशान लगने हि है। JNU issue इस बात का प्रमाण है कि आतंकवाद हमारे सिस्टम में किस तरह से घुस चुका है। ये घटना इस देश की व्यवस्था प्रणाली की नाकामी है। कलम भी खुन उगल रही है, किताबो के पन्ने कब्रस्तानो से कम नही है। आज मां भारती उनके ही बेटे की करतुतो का परिणाम भुगत रही है। गलती सिर्फ नारे लगाने वाले स्टुडन्टस की ही नही है,...